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गुरु अर्जुन देव महाराज के शहीदी दिवस पर ठंडा शरबत पिलाया

मकराना (मोहम्मद शहजाद)। सिख धर्म के पहले शहीद, शांति के पुंज, शहीदों के सरताज, सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी की शहादत को याद करते हुए शहर के बाईपास रोड स्थित गुरुद्वारा गुरुनानक देव जी में मंगलवार को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आमजन व राहगीरों को श्रद्धा भाव से ठंडा शरबत पिलाया गया।

इस अवसर पर बाबा ईश्वर सिंह ने गुरु अर्जुन देव जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरु अर्जुन देव मानवता के सच्चे सेवक, धर्म के रक्षक, शांत और गंभीर स्वभाव के मालिक गुरु अर्जुन देव अपने युग के सर्वमान्य लोकनायक थे। वह दिन-रात संगत की सेवा में लगे रहते। उनके मन में सभी धर्मों के प्रति अथाह स्नेह था। इनका प्रकाश श्री गुरु रामदास जी के गृह में माता भानी जी की कोख से वैशाख वदी 7 सम्वत् 1620 मुताबिक 15 अप्रैल, 1563 ईस्वी को गोइंदवाल साहिब में हुआ।

इनका पालन-पोषण गुरु अमरदास जी जैसे गुरु तथा बाबा बुड्ढा जी जैसे महापुरुषों की देखरेख में हुआ। ये बचपन से ही शांत स्वभाव तथा भक्ति करने वाले थे। विनम्रता के पुंज गुरु अर्जुन देव जी ने लोगों को विनम्र रहने का संदेश दिया। इन्होंने कभी भी किसी को कटु वचन नहीं बोले। इनका संगत को बड़ा संदेश था प्रभु की रजा में राजी रहना। इस मौके पर रंजीत सिंह, जशपाल सिंह खालसा, जोगेंद्र सिंह, लाभ सिंह, रंधीर बरार, श्रवण सिंह, गुरमीत सिंह, रामरतन सैनी, नरेश भंडारी, खेमचन्द मोहनानी सहित अन्य ने अपनी सेवाएं दी।

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