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इमाम हुसैन की याद में तकरीर का हुआ आयोजन


मकराना (मोहम्मद शहजाद)। शहर के इमाम चौक स्थित इमाम आली मकाम मस्जिद के शादी खाना में शनिवार को ईमाम हुसैन की याद में महफिल ए शोहदा ए करबला के नाम से एक जलसे का आयोजन सुन्नी नौजवान कमेटी इमाम चौक के तत्वावधान में आयोजित हुआ।

इस दौरान जोधपुर से आए मौलाना सय्यद नूर मियां अशरफी ने इमाम हुसैन की शान बयान करते हुए कहा कि इमाम हुसैन ने इस्लाम को बचाने की खातिर शहीद हुए। इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में भी नमाज़ नही छोड़ी लेकिन मुसलमान नमाज़ों की पाबंदी नहीं करता। हुसैन आली मकाम ने 9 मोहर्रम की रात को इबादत करते रहे, लेकिन यजीद के हाथ मे हाथ नही दिया। इमाम हुसैन कर्बला के मैदान में इस्लाम की खातिर लड़ते रहे।

नमाज़ की हालत में इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में शहादत पाई। मौलाना ने इमाम हुसैन की याद में तकरीर करते हुए इमाम हुसैन की शहादत को बयान किया। इस दौरान बासनी से आए नात ख्वां मोहम्मद शरीफ बासनी ने में क्या बताऊँ क्या क्या अली का है काबा अली का, जिसने नबी के दीन पे सब कुछ लुटा दिया वो फातमा का चैन दुलारा अली का है या अली या अली, चाहते आप तो खुद दौड़ के आता पानी या हुसैन आपकी ठोकर से निकलता पानी, मेरा बादशाह हुसैन है दीन की पनाह हुसैन है जैसे अनेक कलाम पेश किए।

इस दौरान मौलाना गुलाम साबिर अली, मौलाना गुलाम सय्यद अली, मौलाना मोहम्मद अबरार अली अशरफी, हाफिज फुरकान अली, मौलाना फरदीन, नागौर कांग्रेस जिलाध्यक्ष जाकिर हुसैन गैसावत, नागौर जिला हज कमेटी संयोजक हाजी मोइनुद्दीन अशरफी, सुन्नी नौजवान कमेटी के सदर हाजी मुस्तफा हसन, खजांची हाजी फरीद अहमद गहलोत, शहादत अली गहलोत, मोहम्मद इस्लाम सहित अनेक जने मौजूद रहे। सलातो सलाम के बाद दुआ के साथ जलसा पूर्ण हुआ।

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