
[बाबूलाल सैनी] पादूकलां कस्बे सहित आस पास ग्रामीण आंचल में सोमवार को गोपाष्टमी पर्व हषोउल्लास के साथ गोपाष्टमी पर्व मनाया गया । गौशाला में ग्रामीणों ने लापसी बनाई और गौ माता को खिलाई कस्बे की महिलांए सौलाश्रंृगार कर पूजा की थली लेकर गौशाला की तरफ मंगल गीत गाती हुई गौशाला पहुची गौमाता की विधिवत पूजा अर्चना कर गौकथा सुनी परिकमा की और गौ माता से अपने परिवार की खुशहाली की कामना की रविवार को गौशाला में सुबह से लेकर देर रात गौमाता को गुड़ चारा ड़ालकर रात को सुन्दर काण्ड़ का आयोजन किया गया

भक्तों ने गौ माता की रक्षा करने का संकल्प लिया और देर रात को गोपाष्टमी को महाआरती का आयोजन किया गया जिसमें सभी भक्त शाामिल हुए सोमवार को आज पूरे देश में सनातन धर्म के अनुयायी गोपाष्टमी का पर्व मना रहे है और जगहण्जगह गाय की पूजा की जा रही है। कर रहे है् मथुरा में कृष्ण ने गायों के साथ कई लीलाएँ की है इसीलिए यहाँ गौ पूजन का विशेष महत्त्व है। द्वापर युग में आज ही के दिन भगवान कृष्ण बलराम ने पहली बार गौ चारण लीला की थी और उससे पहले अपने गुरु महर्षि शांडिल्य की आज्ञा से गौ पूजन किया था। धार्मिक मान्यता है कि गाय के अंग प्रत्यंग में तैंतीस करोड़ देवी देवता निवास करते है इसीलिए गौ पूजन से उनके पूजन का भी लाभ मिलता है। बृज में धार्मिक मान्यता और कृष्ण बलराम की परपंरा के अनुरूप जगह जगह गौ शालाओं में गोपाष्टमी के पर्व पर गौ पूजन किया जाता है। इस दिन सबसे पहले गाय को स्नान कराया जाता हैए फिर फूल माला और वस्त्रों से गाय का श्रृंगार किया जाता है। उसके बाद गाय के पैरों में हल्दी लगाकर माथे पर रोली का तिलक लगाया जाता हैए फिर आरती उतारने के बाद गाय की परिक्रमा की जाती है। बृज की ’यादातर गौशालाओं में गोपाष्टमी पर सबसे पहले गौ पूजन कृष्ण बलराम के स्वरुप और उनके ग्वाल बाल करते है। गौ पूजन के बाद कृष्ण बलराम के स्वरुप अपनी प्राचीन परंपरा के अनुसार गौचारण को निकलते है। ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अपने घर में एक गाय अवश्य रखनी चाहिए तथा उसका पालन पोषण करना चाहिए। गोपाष्टमी पर्व पर हमे गौ सेवा का सकंल्प लेना हैं तभी गौ रक्षार्थ तथा गौ सवंद्र्धन की दिशा में सार्थक पहल होगी। गौगाजी गौशाला के अध्यक्ष जितेन्द्र सोनी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अपने घर में एक गाय अवश्य रखनी चाहिए तथा उसका पालन पोषण करना चाहिए। गोपाष्टमी पर्व पर हमे गौ सेवा का सकंल्प लेना हैंए तभी गौ रक्षार्थ तथा गौ सवंद्र्धन की दिशा में सार्थक पहल होगी। गाय के प्रत्येक अंग में देवताओं का वास हैं। ऐसी पवित्र और दिव्य लक्षणों वाली गौ माता को दर दर भटकने के लिए नही छोड़े तथा उनकी सेवा और सरंक्षण करे। गौशाला पहुंचकर गौमाता की पूजा और अर्चना कर गुड़ और लापसी खिलाई तथा गायों की परिक्रमा की। आयोजन को लेकर गौशाला परिसर में दिनभर गौ भक्तों का रेलम पेल से मेले जैसा माहौल रहा। इस मौके पर गायों को हरा चाराए गुड़ तथा लापसी खिलाकर उनका पूजन कर परिक्रमा की गई। इस मौके पर प्रवासी बंधु दानदाता द्वारा गायों के लिए लापसी का दलिया तथा गुड़ की व्यवस्था की गई।


Author: Aapno City News







