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मोबाइल के दौर में अभी भी चलन है कैलेंडर, पंचांग का मोबाइल नहीं पछाड़ पाया इनको


रूण फखरुद्दीन खोखर



रूण-नव वर्ष की शुरुआत के साथ ही रूण क्षेत्र के सभी गांवों में इन दिनों कैलेंडर और पंचांग की बिक्री जोरों पर चल रही है, नव वर्ष लगने के एक महीने पहले से लेकर लगभग पूरे वर्ष तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में कैलेंडर और पंचांग की मांग बरकरार रहती है। ऐसे में कैलेंडर की दुकानें जगह जगह सजने लगती हैं, वर्तमान में मोबाइल का दौर होने पर भी कैलेंडर ने अपनी छवि बरकरार रखी है और छवि बरककार रहेगी।

ग्रामीण अनवर अली गोरी, फखरुद्दीन खोखर, भारूराम मेघवाल,राजेंद्र टेलर ने बताया मोबाइल ने टॉर्च, टेप, रेडियो, टीवी, कांच, कैमरा और अन्य जानकारी की उपलब्धता सब साथ में होने के कारण इन सभी बिजनेस को लगभग ठप कर दिया है, लेकिन मोबाइल कैलेंडर और पंचांग को अब तक नहीं पछाड़ पाया है, जिसका मुख्य कारण यह है कि कैलेंडर में अंग्रेजी तारीख वार त्यौहार की जानकारी मिल जाती है लेकिन विक्रम संवत, नक्षत्र की जानकारी देना मोबाइल के बस की बात नहीं है। ऐसे में ग्रामीण हो या शहरी क्षेत्र सब जगह अभी भी कैलेंडर का प्रचलन चल रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कैलेंडर, डायरियां और नक्षत्र की जानकारी देने वाले कैलेंडर की मांग ज्यादा रहती है। गांव ण के गणपतलाल शर्मा, महेंद्र पुरी गोस्वामी ने बताया कैलेंडर सनातन धर्म से चला रहा है और कैलेंडर या पंचांग के बिना कोई शादी या मुहूर्त भी नहीं निकाला जा सकता है इसकी होढ मोबाइल नहीं कर सकता, इसी प्रकार आज के जमाने के किसान खेती भी नक्षत्र के आधार पर करते हैं इसलिए किसानों की पसंद भी कैलेंडर और पंचांग है, इसलिए हर दुकान पर कैलेंडर और पंचांग खरीदते ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में देखा जा सकता है

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