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मेहनत की कमाई सर्वोत्तम -हीरादास महाराज


रूण फखरुद्दीन खोखर
चिताणी में हुआ सत्संग कार्यक्रम

रूण-मेहनत की कमाई सर्वोत्तम है गैर तरीकों से कमाया धन ज्यादा दिन तक नहीं टिकता है, मेहनत का फल यकीनन मीठा होता है, मेहनत के फल का असर आयुर्वेदिक औषधि की तरह होता है जो धीरे-धीरे असर करता है, जबकि दो नंबर से कमाया हुआ पैसा अंग्रेजी दवाई की तरह होता है जो तुरंत असर तो करता है मगर शरीर को कमजोर कर देता है,

इसी प्रकार किसानों के खेती फसल की कमाई सबसे उत्तम है, हमें मेहनत की कमाई ही करनी चाहिए यह विचार निकटवर्ती गांव चिताणी में सोमवार को  हुए सत्संग समारोह में जोधपुर से आए हीरादास महाराज ने कहे इस अवसर पर इन्होंने संगीतमय भजनों के माध्यम से वर्णन करते हुए सभी भक्तजनों को दुनिया में भलाई के कार्य करने के लिए कहा इन्होंने कहा कि इंसान का दिया हुआ दान ही संग चलेगा बाकी यही रह जाएगा,

हमें ईश्वर भक्ति के साथ-साथ जीव जंतुओं पर भी दया भाव रखना  चाहिए ,वही साल में एक बार अपने घर और प्रतिष्ठानों में सत्संग का आयोजन रखना चाहिए, इन्होंने बताया इस सत्संग समारोह में संत महात्माओं और महापुरुषों से मिलन होता है, इसी प्रकार सगे संबंधियों से भी मुलाकात होती है जो पुण्य का कार्य है। इस मौके पर जोधपुर से आए भूरादास महाराज ने कहा कि संत हमेशा सभी जीवों का हित चाहते हैं और मनुष्य को कड़वी वाणी से बचते हुए और क्रोध का त्याग करते हुए मीठी वाणी का प्रयोग करने के लिए कहा,

इस अवसर पर इन दोनों ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुतियां देकर भक्तजनों का मन मोह लिया, इससे पहले इस मौके पर संत महात्माओं का महिलाओं ने बधावणा गाकर और सभी पुरुषों ने फूलमालाओं से स्वागत किया । इस अवसर पर खेराज महाराज, हरसूखराम, बीरमराम, गणपत, चंदाराम मेघवाल, कानाराम गालवा, चंदाराम सारण, रेवंतराम, गिधाराम, रामचंद्र कावा, जीवनराम, गेनाराम और विक्रम दास सहित काफी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे।

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