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भीषण गर्मी के प्रकोप में रेल कर्मचारियों को राहत की दरकार। खुले में कार्य करने वाले ट्रैकमैन आदि कर्मचारी गर्मी की चपेट में


फुलेरा (दामोदर कुमावत) बरसती आग जैसी भीषण गर्मी का प्रकोप जनजीवन जीव जंतु सहित प्रकृति के लिए भी घातक सिद्ध हो रही है, तापमान 50 डिग्री से ऊपर हो गया है, ऐसे में लोग घरों में ही बैठकर एसी कूलर आदि साधनों से अपने आप को बचा रहे हैं ऐसी परिस्थिति में रेलवे कर्मचारी जो खुले में कार्य कर रहे हैं जैसे ट्रैकमैन, प्वांइट्समैन, कैरिज एंड वैगन,टीआरडी व सिग्नल विभाग कर्मचारी जो सीधे रेल संचालन से जुड़े हैं।

इनको इस भीषण गर्मी में  रेल प्रशासन से कोई राहत नहीं मिल रही है,ऐसी गर्मी में ट्रेक पर कार्य करने वाले कर्मचारीआएदिन हीटवेव के कारण बेहोश हो रहे हैं, पॉइंट्स मैन जिसे लगातार 12 घंटे काम लिया जा रहा है और यार्ड में शंटिंग कार्य में लगे रहते हैं यह ना तो पानी लेकर यार्ड में कार्य कर सकते हैं और ना ही स्टेशन पर जाकर पीने के लिए बार-बारआ सकते हैं

यार्ड में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि लोको पायलट की स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि लोको की केव का तापमान बाहर के तापमान 5 से 8 डिग्री अधिक होता है। इस संबंध में नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पला यूनियन के जोनलउपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह चाहर ने बतायाकि यूनियन को रेल कर्मचारियों पर गर्व है, रेल कर्मचारी सीमा पर खड़े सैनिक से कम नहीं है,

हजारों रेल कर्मचारी प्रतिवर्ष सुरक्षित रेल संचालन करने में अपनी जान गवां देते हैं इस अवसर पर नरेंद्र सिंह चाहर ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि रेल प्रशासन कर्मचारियों से हर परिस्थिति में 100% सही काम की अपेक्षा रखता है, परंतु कर्मचारी हितों के लिए 100% खरा नहीं उतरता।

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