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रावण और राम मे यही फर्क है रावण ने मनुष्यो पर राज किया

ओर राम ने मनुष्यता पर राज किया। सन्त धीरज राम महाराज।

श्रीनाथजी बावा की जीवन्त झाकियों ने सबका मन मोहा।
नाथद्वारा(के के ग्वाल)वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधान पीठ नाथद्वारा नगर के फौज मोहल्ले में स्थित समस्त फूल माली समाज  की हवेली मे चल रहे विराट श्रीनाथ सन्निधि चतुर्मास के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय श्री रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के संत श्री धीरज राम महाराज ने श्री राम कथा के प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान राम के वनवास दौरान भगवान राम और निषाद राज़ गुह का मिलन होता है बस यही से राम राज्य की आधारशिला भगवान ने रख दी जहाँ चराचर का स्वामी एक सामान्य से आदमी को गले लगाता है

और बड़प्पन दे रहा है ये राम की कहानी हमें यह बताती है किसी घर में एक मंथरा निकल जाए तो कितना दुख पैदा हो सकता है और किसी घर में एक राम निकल जाए तो कितना सुख पैदा हो सकता है
ये राम की कहानी जानवरों से मनुष्य बनाने की कहानी है रावण और राम में बस यही फ़र्क है रावण ने मनुष्यों पर राज करा और राम ने मनुष्यता पर राज करा इसलिए रावण की पहचान प्रभाव के कारण होती है हमारी पहचान अभाव के कारण होती है पर राम जी की पहचान उनके स्वभाव के कारण से होती है
मनुष्य बहुत होशियार है उसको लगा यह काम कठिन है उसने बहाने बनाना शुरू कर दिया इसलिए कितने लाखो वर्षों से भगवान आज भी हमारे लिए पराया है कितने सारे अवतार आ गये पर एक भी उतार की प्रेरणा हम ले नहीं पाए मनुष्य बड़ा शातिर है उसको जो काम कठिन लगता है उसको कोस्टक में बंद कर देता है हमारा ईश्वर पृथ्वी पर आया हमको गले लगाया हमारा दोस्त बना हमारा भाई बना हमारे साथ संबंध स्थापित किया उसने करके दिखाया कि ऐसे होता है हम को लगा ये तो बहुत मुश्किल है हम को लगा कि राम के जैसे बाप की बात मानना बहुत मुश्किल है राम के जैसे सत्य बोलना बहुत मुश्किल है एक पतिव्रत धारी रहना बहुत मुश्किल है अपनी पूरी संपत्ति भाई को दे देना बहुत मुश्किल है तो हमने क्या करा जो काम मुश्किल है उसे आसान कर दिया तो हमने राम के बड़े बड़े मंदिर बना दिए और इनको मंदिर में बंद कर दिया और हमने कह दिया ये तो ईश्वर हैं ये तो कुछ भी कर सकता हैआप अपने आपको कमज़ोर बताकर के बचना चाहते हों इसलिए बहाना छोड़िए रास्ता तो बड़ा सीधा है मोड़ दो सारे मन के हैं ज़िंदगी कभी किसी को रास्ता नहीं देती रास्ता स्वयं को बनाना पड़ता है जब हिमालय से गंगा निकलती है तो रास्ता स्वयं बनाती है बीच में पहाड़ भी आते हैं खाई भी आती है पर गंगा कई गांवों को शहरों को राज्यों को पार करते हुए समु्द्र तकपहुँची की जाती है इसके बाद सन्त श्री ने श्रीजी की सजीव झांकियों के साथ केवट का प्रसंग सुनाया जिसे सुनकर कर श्रोता भाव विभोर हो गए उक्त  जानकारी मीडिया प्रभारी संजय गोयल दी।

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