
फुलेरा (दामोदर कुमावत) कस्बे
व आस पास के क्षेत्र में शुक्रवार को शीतलाष्टमी (बास्योडा) पर्व महिलाओं ने बड़े हर्षोउल्लास से मनाया। जबकि गुरुवार के दिन रांदापोआ के रूप में महिलाओं ने शीतलाष्टमी पूजन के लिए घर- घर में विभिन्न प्रकार पुआ पूड़ी, रावड़ी,शक्कर पारे, गूंजे, चक्की आदि पकवान बनाए।

शुक्रवार को अल सुबह से ही श्रृद्धालु महिलाएं अपने परिवार व आस पास की महिलाओ के साथ मिलकर ” भर कण्डवारी निकली र म्हारी सितल माता “के लोक प्रिय गीत गाते हुए शीतला माता के एक दिन पहले बने पकवानों से माता के भोग लगाकर पूजा अर्चना की। मान्यता है कि मां शीतला की पूजा करने से बच्चों के चेचक, खसरा और अन्य चर्म रोग नही होते है।

माता की पूजा के बाद घर के गर्म खाना नही खाते है और ठण्डा खाना ही खाते है। शीतला माता मंदिर पुजारी धन्नालाल प्रजापति ने बताया कि शीतला माता पूजन के बाद शीतला माता व पतवारी माता की कथा सुनी जाती है।कथा के सार में माँ शीतला पर भूलवश एक गृहणी गरम पानी डाल देती है जो गर्म पानी से जलने के कारण एक कुम्हार के घर जाती है।

वहाँ पर ठण्डी मिट्टी डाल कर माता की जलन बुझाई जाती है।आज के दिन सुहागिनै और युवतियां वर -वधू के रुप में गणगोर पूजने के लिये ज्वारे उगाने हेतु कुम्हार के यहां से पवित्र मिट्टी से निर्मित झारे लाती है। गौरतलब है कि इसी दिन से महिलाओं द्वारा गणगौर पूजन की शुरुआत करती है।


Author: Aapno City News







