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केंद्रीय श्रमिक संगठनों का केंद्र सरकार की हठधर्मिता के विरोध में प्रदर्शन


फुलेरा (दामोदर कुमावत)राज्य के केंद्रीय श्रमिक संगठन, इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, राज सीटू, एक्टू आदि के संयुक्त तत्वाधान में श्रम विभाग के कार्यालय के समक्ष केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई आर्थिक, सामाजिक, श्रम संबंधी नीतियाँ, कार्यकलाप एवं श्रमिक, मध्यम वर्ग/गरीब जनता के मुद्दों को लगातार दरकिनार करने संबंधी प्रवृत्ति एवं विशेष रूप से श्रमिक विरोधी चार लेबर कोड लागू करने के निर्णय के विरुद्ध विशाल प्रदर्शन किया गया।

  इस अवसर पर उपस्थित श्रमिको को श्रमिक नेता  कुणाल रावत, मुकेश माथुर, रविन्द्र शुक्ला, राम अवतार स्वामी, रामपाल सैनी, एस के शर्मा आदि ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमने पहलगाम में आतंकी हमला, निर्दोष 26 लोगों की दुःखद हत्या तथा उसके बाद की परिस्थितियों के मध्येनजर 20 मई 2025 की राष्ट्रव्यापी श्रमिक हड़ताल को स्थगित करने का निर्णय लिया, हम आतंकवादियों एवं दुश्मन देश के विरुद्ध भारतीय सेना द्वारा प्रदर्शित बहादुरी पर हम गर्व करते हैं। लेकिन आश्चर्य का विषय है कि ऐसी विषम परिस्थितियों में भारत सरकार, श्रम संहिताओं को लागू करने, काम के घंटे बढ़ाने और ट्रेड यूनियन अधिकारों पर अंकुश लगाने के लिए आक्रामक तरीके से दबाव बना रही है।

सरकार द्वारा कॉरपोरेट घरानों को सक्रिय रूप से समर्थन दिया जा रहा हैं। वैधानिक न्यूनतम वेतन एवं सामाजिक सुरक्षा लाभों का इनके द्वारा खुलकर उल्लंघन किया जा रहा है। प्रधान मंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन में व्यक्त किया गया है कि केंद्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा 20 मई 2025 को निर्धारित “राष्ट्रव्यापी हड़ताल” को 9 जुलाई 2025 तक के लिए स्थगित किया गया है। जबकि केन्द्र सरकार के पास अब लगभग 2 माह का समय है और  “स्वतन्त्रता के पूर्व एवं उसके बाद बनाए गए विभिन्न श्रम अधिनियम एवं कानूनों को बरकरार रखते हुए नए चार लेबर कोड लागू नहीं करने का निर्णय लिया जाएगा।”

ऐसी उम्मीद जाहिर करने के साथ साथ मांग की गई है कि न्यूनतम मजदूरी रु 26000/- प्रतिमाह तय हो, आठवां वेतन आयोग गठित करने संबंधी अधिसूचना शीघ्र जारी करे, सभी संस्थानों एवं औद्योगिक इकाईयों में कार्यरत श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के सुनिश्चय के साथ गारन्टीड पेंशन का लाभ मिले, समाप्त किए गए 3 कृषि कानूनों को वापिस लाने के प्रयास पर विराम लगाया जाएं तथा सी 2 प्लस 50 के आधार वैधानिक एमएसपी और उस आधार पर, सुनिश्चित खरीद पर प्रतिबद्धता को लागू किया जाए।
केन्द्रीय श्रमिक संगठनों ने यह भी मांग की हैं कि रेलवे, बैंक, बीमा, बंदरगाह और गोदी आदि का निजीकरण रोका जाएं। स्वास्थ्य, बिजली, शिक्षा सेवाओं को सरकारी क्षेत्र में ही बनाए रखा जाएं। ठेका श्रमिकों को नियमित श्रमिकों के समान वेतन, भत्ते एवं अन्य सुविधाएं दी जाएं। समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया जाए। रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाएं एवं नियमित रोजगार दिया जाएं। 8 घंटे से अधिक कार्य/ड्यूटी नहीं कराई जाएं, इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित हो। न्यूनतम पेंशन राशि रु 9000/- प्रतिमाह तय की जाए। आँगनबाड़ी, आशा, मिड डे मील तथा आशा किरण आदि स्कीम वर्कर को श्रमिक का दर्जा प्रदान किया जाए। मनरेगा मे न्यूनतम मजदूरी मे वृद्धि के साथ-साथ, वर्ष मे कम से कम 200 दिन के रोजगार की गारंटी हो, सहित विभिन्न बकाया मांगों का शीघ्र निराकरण किया जाएं।प्रदर्शन में डी एल छंगाणी, मुकेश चतुर्वेदी, भंवर सिंह, जीवन गुर्जर, राजीव सारण, रमेश चतुर्वेदी, किशन सिंह, राकेश यादव, बी एम सुंडा, राशिदजुम्मा खान सहित अनेक साथी उपस्थित थे।

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