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पाश्चात्य संस्कृति छोड़ो , भारतीय संस्कृति को अपनाओ- चेतनराम महाराज


रूण- फखरूदीन खोखर

चिताणी गौशाला भागवत कथा में उमड़ रहे हैं श्रद्धालु

रूण-आजकल के बच्चे अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं माता-पिता को अपने बच्चों को सुंदर संस्कार देना चाहिए, हमें पश्चिमी संस्कृति को छोड़कर भारतीय संस्कृति को अपनाना चाहिए, आजकल की पीढ़ी सनातन धर्म को भूल रही है यह विचार चिताणी गांव में चल रही भागवत कथा के दौरान संत चेतन राम महाराज ने रविवार को कहे,

इस दौरान उन्होंने कहा कि भगवान के परम लाड़ले भक्त ध्रुव चरित्र 5 साल की छोटी सी उम्र में जंगल में जाकर भगवान को किस तरह से प्राप्त किया और गुरु महिमा बताई कि जीवन में भव से पार होने के लिए गुरु बनाना जरूरी है, इस पृथ्वी पर भगवान अवतार लेकर आए तो उन्होंने भी गुरु बनाएं हैं, इसलिए जीवन में गुरु सच्चा होना चाहिए और महाराज ने भगवान के नौवे अवतार पृथु चरित्र का वर्णन किया आगे भरत चरित्र के प्रसंग पर बताया अंत समय में जैसी मति होगी वैसी गति होगी,

भरत महाराज का मन अंत समय में हिरनी में फंस गया और अगले जन्म में भरत को हिरनी बनना पड़ा फिर हिरनी की योनि को त्याग कर मनुष्य योनि प्राप्त कर भगवान को प्राप्त किया और भूमि संतो के महापुरुषों की रही है यहां पर अनेका अनेक ऐसे ऐसे संत और महापुरुष हुए हैं जिन्होंने जीवन पर्यंत राम नाम के सहारे ही जीवन यापन किया जैसे दरियाव महाराज, गुलाबदास महाराज, रामदास महाराज भक्तिराम महाराज ,बाला सती ऐसे ऐसे महापुरुष इस भूमि पर आए हैं

ऐसे ऐसे त्यागी महापुरुष जिन्होंने इस संसार की मोह माया को त्याग कर सिर्फ राम नाम का सहारा लेकर ही भगवान को प्राप्त कर लिया और आगे महाराज ने अजामिल प्रसंग सुनाया जिसने जीवन पर्यंत पाप कर्म किया और अंत समय में संतो के कहने पर अपने पुत्र का नाम नारायण रखकर भगवान को प्राप्त किया । अंत में उन्होंने विशेषकर माता पिता और भाइयों की हर संभव मदद करने की बात पर बल दिया।

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