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इंदोकली के किसान की चूल्हे की आग से जलकर हुई मृत्यु


रूण- फखरुद्दीन खोखर

पूरे गांव में शोक की लहर

मंगलवार को बहन के था मायरा, इकलौता भाई शामिल नहीं हो पाया, ग्रामीणों ने भरी भात

फखरुद्दीन खोखर- रूण-कभी-कभी विधि का ऐसा विधान हो जाता है कि आदमी सोचता कुछ और है और हो जाता कुछ और है, यह सब ईश्वर के हाथ में है, इसी कड़ी में निकटवर्ती गांव इंदोकली के किसान प्रकाश भाकर(47) के साथ कुछ ऐसा ही हुआ।

कुचेरा थाने में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार इसके बहनोई गणपतराम खजवाना ने बताया कि प्रकाश भाकर जाट अपनी पत्नी, दो बच्चों के साथ रोजाना की तरह अपने घरेलू और पशुओं का कार्य निपटाकर ट्रैक्टर पर बीज रखकर खेत जोतने के लिए रवाना हो रहा था,इस दौरान प्रकाश को चाय की तलब होने पर खुद मिट्टी वाले चूल्हे पर चाय बना रहा था, ऐसे में अचानक उसके ढीले कपड़ों ने जबरदस्त आग पकड़ ली उसके चिल्लाने पर उसकी घरवाली और पड़ोसियों ने दौड़कर आग बुझाने का प्रयास किया, मगर तब तक प्रकाश 90 प्रतिशत झुलस गया, तब ग्रामीणों की मदद से उसे 50 किलोमीटर दूर राजकीय अस्पताल नागौर ले जाया गया, वहां से 120 किलोमीटर दूर जोधपुर महात्मा गांधी अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां पर प्रकाश ने इलाज के दौरान सोमवार सुबह अंतिम सांस ली।

वही इसके निधन की खबर सुनते ही सोशल मीडिया पर उसके दोस्तों और गांव वालों में जबरदस्त शोक की लहर छा गई,ग्रामीण सुरेंद्र उपाध्याय और सुरेश भाकर ने बताया कि सोमवार देर शाम को उसका गमगीन माहौल में इंदोकली में अंतिम संस्कार किया गया। गौरतलब है कि प्रकाश की मां 10 वर्ष पहले बीमारी की वजह से स्वर्ग सिधार चुकी थी, वही 80 वर्षीय पिता सांवताराम जाट शुगर की बीमारी से पीड़ित हैं और इसके घर में पत्नी के अलावा दो लड़के हैं। वही प्रकाश के निधन की खबर से अंतिम संस्कार के बाद भी पिता, बहनों, पत्नी, और बच्चों का रो रोकर बुरा हाल हो रहा है।

*मंगलवार को हुई भांजे की शादी में इकलौता मामा नहीं हो पाया शामिल*

छह बहनों के बीच में प्रकाश इकलौता भाई था और बीते कल मंगलवार को आसोप के पास रामपुरा गांव में भांजे की शादी में भात लेकर भी जाना था, जिसकी पूरी तैयारियां चल रही थी, घर परिवार में खुशी का माहौल था,मगर विधि का विधान ही कुछ ऐसा था कि खुशियां गम में बदलती नजर आने लगी और मामा चल बसा और भांजे की शादी में इकलौता मामा शामिल नहीं हो पाया, ऐसे में ग्रामीणों ने मंगलवार को गमगीन माहौल में घरवालों और अपनी ओर से मायरा भरकर रस्म पूरी की। इस दौरान सोहनराम, मदनराम, शंकरलाल, जोगाराम, जयनारायण, रामपाल, कैलाश, भूराराम, प्रेम, सियाराम,शिवदान, गजेंद्र, सुरेंद्र भाकर, देवाराम, रामकुंवार, गणपतलाल सहित काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

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