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सर्दी रो आनंद बड़ीया और राबोड़ीया बनाने में


फखरुद्दीन खोखर
रूण( नागौर)


सर्दी का मौसम शुरू होते ही गांवो में सूखी सब्जी बनाने का कार्य शुरू

रूण (नागौर) आधुनिक युग में हर आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन फैक्ट्री और कंपनियों में होने लगा है और लगभग हर आदमी बनी बनाई वस्तुएं या रसोई में काम आने वाली सूखी सब्जियां खरीद कर आवश्यकता की पूर्ति करने में लगा हुआ है, मगर इस दौर में भी गांव में आज भी बहुत सी गृहणीया घर पर ही 12 महीने काम आने वाली सुखी सब्जियां बनाकर भंडारण करती है, जो बाजार भाव से सस्ती भी पड़ती है, जिसमें पापड़, बड़ी, राबोड़िया, खिचिया, सलेवड़ा प्रमुख है।

अफसा बानो खोखर और गुड्डी बानो ने बताया जिस प्रकार पुराने जमाने में दैनिक जीवन की आवश्यक वस्तु का उत्पादन ग्रामीण महिलाएं अधिकतर घर पर ही किया करती थी, लेकिन गांवो में आज भी यह परंपरा कायम है , वैसे शहरों में समस्त वस्तुओं के लिए व्यक्ति फैक्ट्री और कंपनियों में बनी बनाई सब्जियों पर ही निर्भर हो गए हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी है,परंतु गांवो में आज भी महिलाएं अपने बलबूते और अपनी मेहनत से ऐसी सब्जियां बनाती हैं जिसमें शुद्धता पर पूरा विश्वास सबको होता है, किसान वर्ग खरीफ की फसल लेने के बाद जैसे ही सर्दियां शुरू होती हैं तब गांवों में पापड़, बड़ी और राबोड़ी बनाने की सीजन शुरू हो जाती हैं जो लगभग 4 महीने तक चलती है।

इसमें मोहल्ले की काफी महिलाएं एकत्रित होकर मिल बैठकर बारी-बारी से अपने-अपने घरों में सूखी सब्जियां राजस्थानी गीत गाते हुए और बातें करते हुए बनाती हैं और खुशहाली का संदेश भी देती है इन्होंने बताया कि ऐसे मौके पर महिलाओं का आपस में मिलने का और खुशी बांटने का अवसर भी मिलता है, घरेलू सब्जियों में मुख्यतः मानी जाने वाली ऐसी सभी सब्जियां सीजन शुरू होते ही बनाने के लिए महिलाओं में अलग ही उत्साह नजर आता है, रईसा बानो और कूका बानो ने बताया कि वर्तमान युवा पीढ़ी को ऐसी सब्जियां बनाने की कला सीखाना भी जरूरी है, तभी यह परंपरा आगे से आगे बढ़ेगी इन्होंने बताया घर की बनी हुई सब्जियों में उच्च कोटि की गुणवत्ता और शुद्धता होती हैं और ऐसी सूखी सब्जियां एक साल तक खराब भी नहीं होती है काफी महिलाएं शहर में रहने वाले और राजस्थान से बाहर रहने वाले अपने रिश्तेदारों को भी भेंट के रूप में सूखी सब्जियां भेजती है।

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